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गुरुवार, मार्च 14, 2013

छोटी बहन द्वारा शिक्षा


कल मेरा अपने भतीजे (अपने चाचा स्व. गोपी राम जैन जी के पोते प्रवीन जैन सपुत्र श्री सुभाष चन्द्र जैन) की शादी में जाना हुआ. कल मेरा काफी सालों बाद किसी शादी में पूरी रात रुकना हुआ. जिसमें शादी-विवाह की रस्मों को काफी नजदीक से देखने का सुअवसर मिला.जहाँ एक ओर शादी-विवाह में काफी हंसी-मजाक का दौर चलता है. वहीँ दूसरी ओर शादी-विवाह में शिक्षाप्रद, प्रेरणादायक बातों के साथ ही गमहीन मौहाल बन जाता है.  इसी प्रकार कल प्रवीन जैन की "ज्योति" से हुई शादी में फेरों के बाद जब वधू की छोटी बहन "शैफाली" ने बड़ी बहन को "शिक्षा" दी. बहुत सुंदर शब्दों में लिखी शिक्षा को जब पढकर सुनाया तब उस समय जहाँ एक ओर सभी बाराती-घरातियों ने खूब जोर से ताली बजाकर प्रंशसा की. वहीँ दूसरी ओर वधू "ज्योति" का एक-एक पंक्ति पर मन गमहीन हो गया, क्योकि जिस घर में सालों तक अपने छोटे-भाई के साथ खेली-कुदी थी. जिसे अपना घर कहती थी, अब वो पराया हो गया था. मगर जमाने की रीति यहीं है...इसलिए उसको छोड़कर जा रही थी.
           आज के समय में भाग-दौड भरी जिंदगी में आज किसी के पास बेटी को अच्छी शिक्षा देने का बहुत कम समय मिल पाता है. पहले के समय संयुक्त परिवार होते थें. उसमें बड़े बजुर्ग अपनी विदा होती बेटियों को अपने पति के साथ ही सास-ससुर, ननद-देवर आदि का मान-सम्मान रखने के साथ ही कहते थें कि-बेटी तुम्हारे हाथ में दो परिवार की "इज्जत" को बनाये रखने की जिम्मेदारी है. ऐसी ही कुछ पंक्तियाँ वधू की छोटी बहन "शैफाली" द्वारा अपनी शिक्षा के माध्यम कही. उस "शिक्षा" को एक बहुत-ही सुंदर ग्रीटिंग कार्ड में लिखा हुआ था. जो उसने शिक्षा पढ़ने के नेग (शगुन) लेने के बाद अपने जीजा श्री प्रवीन जैन को दे दिया था. उसी शिक्षा की उन चंद पंक्तियों के लिए आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ.
अपनी प्यारी बहन को एक बहन की शिक्षा, मेरी बहन मैं तुमसे ज्यादा तो नहीं जानती, मगर फिर भी....कुछ शब्दों द्वारा अपनी बात रखने का प्रयास किया है.  

 "दो फूल खिले दो ह्रदय मिले, दो कलियों ने श्रृंगार किया
   आज के दिन दो पथिकों ने, संग-संग चलना स्वीकार किया"

तर्ज:-जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......
मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......

वर्षों तलक थी जहाँ तुम पली, 
हुआ घर वो पराया तुम्हारे लिए.
हमसे बिछुड़कर हमें ना भूलना, 
चाहत को हमारी ना रुसवा करना.
जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......

मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......
सास-ससुर तेरे आज से बहना, 
मात-पिता हैं यह जानले बहना.
रहेगी जो इनकी सेवा में बनीं, 
तेरे मन की कलियाँ रहेगी खिली.
जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......

मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......
ननद और तेरे वर के जो भ्राता, 
भाई-बहन का हुआ उनसे नाता.
करोगी जो इनको प्यार तुम यथा, 
इज्जत रहेगी तुम्हारी सदा.
जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......

मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......
सबका यथायोग्य सत्कार करना, 
किसी का ना तुम अपमान करना.
सबको ही जो तुम प्रेम करोगी, 
भली तुम सभी को लगती रहोगी.
जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......

मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......
सीता-सावित्री सी बनके दिखाना, 
यश तेरा गाएगा सारा जमाना.
पति की तुम सेवा करना सदा,
तुम्हारे लिए अब वहीँ देवता.
जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......

मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......
अगर बदनसीबी से बुरे दिन जो आएँ, 
देख पांव तेरे ना कभी लड़खड़ाएँ.
ऐसे समय में भी खुश जो रहोगी, 
समझ लेना घड़ियाँ दुःख की टल जायेगी.
जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......

मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......
जीजा जी हमारी यह बात ज़रा ध्यान से सुनना, 
ज्योति को हमारी बड़े प्यार से रखना.
नाज़ुक है फूल-सी है, लाडों में पली, 
हमारे घर की एक नन्हीं कली.

जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......
मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......  
जीजा जी प्रार्थना हमारी स्वीकार कर लेना, 
राहों के काँटों को भी फूल कर देना.
यहीं हमारी एक विनती है इंकार ना करना, 
बहन को हमारी बड़े प्यार से रखना .

जुदा तुमको करने की चाह नहीं है......
.मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......  
ज्योति की ज्योत सदा जलती रहेगी, 
प्रवीन को तू प्यारी सदा लगती रहेगी.
उम्र-भर का साथ है सात फेरों का बंधन, 
शैफाली चाहे सात जन्मों तक रहे यह संगम.
जुदा तुमको करने की चाह नहीं है.......

मगर इस जमाने की रीति यहीं है.......


 प्रवीन और ज्योति आपको हमारी तरफ से शादी की ढेरों शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई, आने वाला प्रत्येक नया दिन, आपके जीवन में अनेकानेक सफलताएँ एवं अपार खुशियाँ लेकर आए !! इस अवसर पर ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह, वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, आदर्श, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आजीवन आपको जीवन पथ पर गतिमान रखे !!! जीवन हर पल जीने, उत्साह उमंग के साथ उसे अनुभव करने का नाम है ! हर दिन का शुभारम्भ उत्साह के साथ ऐसे हो जैसे नया जन्म हो,दिन भर हर क्षण योगी की तरह जियो, जरा भी नकारात्मकता को प्रविष्ट मत होने दो ! सकारात्मक, सकारात्मक मात्र सकारात्मक ! यही तुम्हारा चिन्तन हो ! यह चिन्तन यदि दापंत्य जीवन के शुभारम्भ से ही अपनाने का संकल्प ले लो, तो तुम्हें सफलताओं के शीर्ष तक पहुँचने में ज्यादा विलम्ब न होगा !! ईश्वर करे आप में आनंद और उल्लास जगे.आपके सुखद व उज्जवल भविष्य की मंगलकामना ईश्वर से और हमारे गुरुसत्ता से करते हैं."हर दिन नया जन्म समझें, उसका सदुपयोग करें" सदैव आपका दापंत्य जीवन सुखमय रहे. परमपिता आपको रोग दोष मुक्त जीवन प्रदान कर दिर्घायु बनाये, माँ भारती की सेवा और रक्षा हेतु आपको और अधिक साहस,सामर्थ, इच्छाशक्ति प्रदान करें, आप प्रगति पथ पर निरंतर उन्नति प्राप्त करें, आपकी यश कीर्ति इस संसार के समस्त कोनों में सूर्य के प्रकाश की तरह ऊर्जा और चन्द्रमा के प्रकाश की भांति शीतलता प्रदान करें, दुःख, शोक, भय आपको छूकर भी ना निकले.उस सर्वशक्तिमान परमपिता परमेश्वर से यह प्रार्थना है कि आज की मेरी हर प्रार्थना को जो मैंने आपके लिए की है,वो पूर्ण हो.
शुभाकांक्षी-रमेश कुमार जैन

शुक्रवार, अक्तूबर 19, 2012

आपके जन्मदिन उत्सव

आपके जन्मदिन उत्सव पर
आज तुम जिंदगी की राहों में
छोड़ आई हो कितने ढेर से दिन
अब उन्हें ढूँढना भी मुशिकल है
अब वहां लौटना भी नामुमकिन.
यह नया साल की जिंदगी तुम्हें
झिलमिलाते चिराग दे जाये
जिनके एहसास से हो दुःख तुम्हें
हसरतों के वो दाग ले जाये
फिर जब आये यह जन्मदिन उत्सव
तुम मेरा गीत गुनगुना लेना
यूँ ही जब शाम डूबने को हो
याद का एक "दिया" (दीपक) जला लेना.
 रब से दुआ कर रहे हैं हम,
आपके पास आये कोई गम
आपके जन्मदिन पर खुदा से  
यह मांगते हैं हम,
 हर कामयाबी चूमें आपके कदम". 
"हो मुबारक यह जन्मदिन तुम्हें, 
जहाँ तुम्हारा आबाद रहे,
जब तक दुनियां चलती रहे,
तब तक तुम्हारी याद रहे"
"नववर्ष खुशियों भरा मिलें"

इस साल का हर दिन  तुम्हें खुशियों भरा मिलें
जब भी मुझे मिलो तो बस हँसता हुआ मिलो
जिस राह भी तू जाये मंजिल की तलाश में
खुदा करें तुझे तेरी मंजिल का हर निशां मिले
हर सुबह तुझे इक नई ख़ुशी मिले
आपके जीवन का हर पल यूँ ही फूले-फले
पतझड़ कभी जो आये तो दुआ है मेरी
तुझे सदा फूलों-सा महकता चमन मिले.

वाह ! कमाल हो गया दोस्तों. आज( 20 अक्टूबर ) मेरे अलावा जिन चार अन्य दोस्तों का जन्मदिन है. उनमें से एक वकील Pawan Mowar Pranay , दूसरी गायिका Sonu Kakkar, तीसरी पत्रकार Vandana Singh और चौथे बिजनेस मैंन पवन जैन है. यानि सभी समाज में अपना अपना योगदान दे रहे है. यह सब मेरी आई.डी में शामिल दोस्त है. इसको कहते है कि जब देता है तो भगवान छप्पर फाड़ के देता है. मैं अपने अन्य सभी दोस्तों के लिए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ और बहुत सारी शुभकामनाओं के साथ अपनी बात बस इन्ही शब्दों के साथ खत्म करता हूँ कि:-


"हमारी तरफ से जन्‍मदिवस पर ढेरों शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई मित्र, सदैव आपका जीवन सुखमय रहे. परमपिता आपको रोग दोष मुक्त जीवन प्रदान कर दीर्घायु बनाये, माँ भारती की सेवा और रक्षा हेतु आपको और अधिक साहस,सामर्थ, इच्छाशक्ति प्रदान करें, आप प्रगति पथ पर निरंतर उन्नति प्राप्त करें, आपकी यश कीर्ति इस संसार के समस्त कोनों में सूर्य के प्रकाश की तरह ऊर्जा और चन्द्रमा के प्रकाश की भांति शीतलता प्रदान करें, दुःख, शोक, भय आपको छूकर भी ना निकले.उस सर्वशक्तिमान परमपिता परमेश्वर से यह प्रार्थना है कि मेरी हर प्रार्थना को जो मैंने आपके लिए की है,वो पूर्ण हो."
दोस्तों ! एक ओर रोचक बात हम ओर सोनू कक्कड एक-दूसरे से मात्र पांच सौ मीटर की दूरी पर रहते थें. मगर हम एक-दूसरे के दोस्त अभी कुछ समय पहले ही बने है. वैसे इनके पिताश्री आदि हमें काफी समय से जानते हैं. उनके पापा के विज्ञापन हमारे "शकुन्तला टाइम्स" में प्रकाशित हुए है ओर मैंने "सोनू कक्कड-नेहा कक्कड" की काफी "माता की भेंटे" पत्रकारिता के क्षेत्र में आने से पहले ही सुनी हुई है. बाद में कभी प्रत्यक्ष रूप से सुनने का मौका नहीं मिला. वैसे सी.डी., टी.वी., सोनी टी.वी., इंटरनेट आदि पर खूब सुना है. इसके अलावा ओर भी बहुत से रोचक तथ्य है.

एक और याद इस लिंक को देखकर ताजा करें. 

शुक्रवार, मई 04, 2012

श्रीमान जी, मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें  हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.


मंगलवार, जनवरी 03, 2012

नववर्ष 2012 की हार्दिक शुभकामनाएँ

आओ दोस्तों ! नववर्ष 2012 में प्रतिज्ञा लें कि "एक दीया तुम जलाओ, एक दीया हम जलाएं. कुछ अँधेरा तुम मिटाओ, कुछ अँधेरा हम मिटाएं" आप व आपके परिवार के सभी सदस्यों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ. 
नव वर्ष 2012 आपके एवं आपके परिवार के लिए सुख, शांति, सम्पन्नता, समृद्धि एवं सफलता लेकर आए । ईश्वर से नववर्ष पर यही कामना है।
   एक संकलन रचना पर गौर कीजिए:-
"चंद लम्हे ही सही"
चंद लम्हे ही सही , तेरा मेरा साथ चले ,
जब भी यारों में चले , तेरी मेरी बात चले ।
लोग हँसते रहें , खामोश हम अकेले में
देखते जाएँ जो तूफान और बरसात चले ।
बस तू एक बार ठहर जाओ मेरी बाहों में
अब्र में चाँद जो चाहे तो सारी रात चले ।
और सिरफिरा तुझे क्या चाहिए जमाने से
जब तलक चल सके ये पागले हालात चले ।
 
*******************
"उच्च आदर्शों के पुष्प चढ़ाएँ"
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ;
ईश्वर से हम करें प्रार्थना,
उच्च आदर्शों के पुष्प चढ़ाएँ.
सरक जाता है जिस तरह रेत
समझ ले मानव मुठ्ठी से,
निकल गया यह कालखंड भी
सरककर आज हमारी मुठ्ठी से;
दुर्गुणों पर विजय करें हम
देश का जग में मान बढाएँ;
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ.
क्या खोया क्या पाया हमने,
देखी प्रभु की माया हमने?
भटक रहे हम जिसकी खोज में
क्या उसे पाकर भी पाया हमने?
भटक गए हम स्वयं के अरण्य में
आओ खुद का पता लगाएँ;
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ.
क्या सीखा हमने इस बीते वर्ष से?
क्या किया हमने इस बीते वर्ष में?
सोंचा है कभी शांतचित्त होकर
करना क्या है नए वर्ष में?
आओ मिलकर सोंचें-विचारें
नववर्ष की योजना बनाएँ;
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ.
 
आया है समय नए अवसर लेकर 
करें प्रयत्न हम नव निर्माण का;
बीते दिनों के ध्वंस भुलाकर
करें स्वागत हम नवविहान का;
जाना है हमें मंजिल तक
आओ मिलकर कदम बढाएँ;
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ;
ईश्वर से हम करें प्रार्थना,
उच्च आदर्शों के पुष्प चढ़ाएँ.
*********************
     मुझे अपनी वहकी हुई और पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा पार करती मेरी "कलम" के लिए मुझे फाँसी की भी सजा होती है।तब मैं अपनी फाँसी के समय से पहले ही फाँसी का फंदा चूमने के लिए तैयार रहूँगा और देश के ऊपर कुर्बान होने के लिए अपनी खुशनसीबी समझूंगा. इसके साथ ही मृत देह (शरीर) को दान करने की इच्छा है और अपनी हडियों की "कलम" बनवाकर देशहित में लिखने वाले पत्रकारों को बांटने की वसीयत करके जाऊँगा.  
http://shakuntalapress.blogspot.com/2012/01/blog-post.html
 
 

शनिवार, दिसंबर 24, 2011

कागज के रावण मत फूकों, जिन्दा रावण बहुत पड़े हैं

दोस्तों, फेसबुक पर डाले एक नोट को देखें. यह विजयदशमी के मौके पर डाला गया था. इस नोट पर आई टिप्पणियाँ भी बहुत गजब की थीं. आप यहाँ (http://www.facebook.com/note.php?note_id=241861105864534) पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं.   

       हम दशहरे पर बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के लिए कागज के रावण बहुत फूंकते हैं. मगर समाज की बुराईयों व भ्रष्टाचार के खिलाफ चुप बैठे रहते हैं. इसी व्यवस्था पर कवि स्व. मनोहर लाल "रत्नम" अपनी एक कविता में कहते हैं कि "अर्थ हमारे व्यर्थ हो रहे, कागज के पुतले और खड़े हैं. कागज के रावण मत फूकों, जिन्दा रावण बहुत पड़े हैं" आज हमें उठना होगा और समाज की बुराईयों व भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी. हम सब में कही न कही आज भी रावण मौजूद है. हम कागज के रावण जलाते हैं. लेकिन हम अपने अंदर के रावण को नहीं मारना चाहते हैं. क्यों नहीं इस पावन दशहरा के अवसर पर हम अपने अन्दर रह रहे रावणरूपी दानव को जलाकर आओ हम सब असली दशहरा मनायें. क्या ख्याल है...........आपका ? आप सभी को और आपके परिवार को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें.

रमेश कुमार सिरफिरा द्वारा 6 अक्टूबर 2011 को 17:59 बजे पर

मौत आने तक सच लिखेंगी मेरी कलम
.

सोमवार, अक्तूबर 24, 2011

शुभदीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

र आंगन, हर चौखट पर, हर धड़कन, हर उम्मीद पर, हर शब्द और हर पन्ने पर जले प्यार की बाती "शकुन्तला प्रेस" परिवार की ओर से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी शुभदीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! झिलमिलाते दीपो की आभा से प्रकाशित, ये दीपावली आप सभी के घर में धन धान्य सुख समृद्धि और इश्वर के अनंत आर्शीवाद लेकर आये. दीप मल्लिका दीपावली -समस्त मित्रों के लिए परिवार के लिए सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो...इसी कामना के साथ...आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक मंगलकामनाएं !"
       आपके घर में रौशनी की जगमग हो. स्वादिस्ट पकवान बनें और मिठाइयों का आदान-प्रदान हो. पूजा के दौरान श्री लक्ष्मी माता का आगमन हो. आपके चारों खुशियों का वातावरण हो. दु:खों-ग़मों और मुसीबतों का बेसरा बस मेरे घर तक ही सीमित हो. आपका व आपके परिवार का इनसे दूर-दूर तक कोई वास्ता भी न हो. इन्हीं मंगल कामनाओं के साथ...........एक फिर से "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार और "शकुन्तला एडवरटाईजिंग एजेंसी" की ओर से आप व आप सभी के परिवारों को दीपावली, गोबर्धन पूजा और भैया दूज की हार्दिक शुभकामनायें
        #आपका अपना शुभाकांक्षी-निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि व लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन:09868262751, 09910350461

दोस्तों और देश के लिये मंगल कामनाये करते हुए जैन धर्म का केवल जल पीकर रखे जाने वाला व्रत रखकर और छोटे-छोटे जीवों की रक्षा करते बम-पटाखे ना बजाकर/चलाकर अपनी दीपावली मना रहा हूँ. आप दीपावली किस प्रकार मना रहे हैं ?
 महत्वपूर्ण संदेश-समय की मांग, हिंदी में काम. हिंदी के प्रयोग में संकोच कैसा,यह हमारी अपनी भाषा है. हिंदी में काम करके,राष्ट्र का सम्मान करें.हिन्दी का खूब प्रयोग करे. इससे हमारे देश की शान होती है. नेत्रदान महादान आज ही करें. आपके द्वारा किया रक्तदान किसी की जान बचा सकता है.

मंगलवार, सितंबर 13, 2011

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

हिंदी दिवस के सुअवसर पर-गूगल, ऑरकुट और फेसबुक के दोस्तों, पाठकों, लेखकों और टिप्पणिकर्त्ताओं को हार्दिक शुभकामनायें और बधाई!
 
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 

 आइये दोस्तों, इस बार के "हिंदी दिवस" पर हम सब संकल्प लें कि-आगे से हम बात हिंदी में लिखेंगे/बोलेंगे/समझायेंगे और सभी को बताएँगे कि हम अपनी राष्ट्र भाषा हिंदी (और क्षेत्रीय भाषाओँ) को एक दिन की भाषा नहीं मानते हैं. अब देखते हैं, यहाँ कितने व्यक्ति अपनी हिंदी में टिप्पणियाँ करते हैं? अगर आपको हिंदी लिखने में परेशानी होती हो तब आप यहाँ (http://www.google.co.in/transliterate) पर जाकर हिंदी में संदेश लिखें .फिर उसको वहाँ से कॉपी करें और यहाँ पर पेस्ट कर दें. आप ऊपर दिए लिंक पर जाकर रोमन लिपि में इंग्लिश लिखो और स्पेस दो.आपका वो शब्द हिंदी में बदल जाएगा.जैसे-dhanywad = धन्यवाद.          दोस्तों, आखिर हम कब तक सारे हिन्दुस्तानी एक दिन का "हिंदी दिवस" मानते रहेंगे? क्या हिंदी लिखने/बोलने/समझने वाले अनपढ़ होते हैं? क्या हिंदी लिखने से हमारी इज्जत कम होती हैं? अगर ऐसा है तब तो मैं अनपढ़, गंवार व अंगूठा छाप हूँ और मेरी पिछले 35 सालों में इतनी इज्जत कम हो चुकी है, क्योंकि इतने सालों तक मैंने सिर्फ हिंदी लिखने/ बोलने/ समझने के सिवाय कुछ किया ही नहीं है. अंग्रेजी में लिखी/कही बात मेरे लिए काला अक्षर भैंस के बराबर है.         दोस्तों, मैं हिंदी में लिखी या की हुई टिप्पणी जल्दी से पढ़ लेता हूँ और समझ भी जाता हूँ. अगर वहां पर कुछ लिखने का मन करता है. तब टिप्पणी भी करता हूँ और कई टिप्पणियों का प्रति उत्तर भी देता हूँ या "पसंद" का बटन दबाकर अपनी सहमति दर्ज करता हूँ. अगर मुझे आपकी बात समझ में ही नहीं आएगी. तब मैं क्या आपकी विचारधारा पर टिप्पणी करूँगा या "पसंद" का बटन दबाऊंगा? कई बार आपके सुन्दर कथनों और आपकी बहुत सुन्दर विचारधारा को अंग्रेजी में लिखे होने के कारण पढने व समझने से वंचित रह जाता हूँ. इससे मुझे बहुत पीड़ा होती है, फिर मुझे बहुत अफ़सोस होता है.अत: आपसे निवेदन है कि-आप अपना कमेंट्स हिंदी में ही लिखने का प्रयास करें.

रविवार, अगस्त 14, 2011

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जनहित में एक बहुमूल्य संदेश

 आप सभी देशवासियों और आपके परिवार को 65वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

जनहित में एक बहुमूल्य संदेश:-

आप सभी यहाँ पर  पोस्ट डालने और टिप्पणी करने वाले दोस्तों को एक विनम्र अनुरोध है.आप इसको स्वीकार करें या ना करें. यह सब आपके विवेक पर है और बाकी आपकी मर्जी. जो चाहे करें. यह ब्लॉग जगत आपका खुद का मंच है. ज्यादा से ज्यादा यह होगा.आप जो भी पोस्ट और टिप्पणी अंग्रेजी में डालेंगे.उसको हम(अनपढ़,अंगूठा छाप) नहीं पढ़ पायेंगे. अगर आपका उद्देश्य भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपना संदेश(पोस्ट और टिप्पणी) पहुँचाने का है और आपके लिखें को ज्यादा व्यक्ति पढ़ें. तब हमारे सुझाव पर जरुर ध्यान देंगे. आपकी अगर दोनों भाषाओँ पर अच्छी पकड़ है. तब उसको ध्दिभाषीय में डाल दिया करें. अगर संभव हो तो हिंदी में डाल दिया करें या फिर ध्दिभाषीय में डाल दिया करें.मेरा विचार हैं कि अगर आपकी बात को समझने में किसी को कठिनाई होती है. तब आपको हमेशा उस भाषा का प्रयोग करना चाहिए जो दूसरों को आसानी से समझ आ जाये. बुरा ना माने.बात को समझे. जैसे मुझे अंग्रेजी में लिखी बात को समझने में परेशानी होती है. 
महत्वपूर्ण संदेश-समय की मांग, हिंदी में काम. हिंदी के प्रयोग में संकोच कैसा,यह हमारी अपनी भाषा है. हिंदी में काम करके,राष्ट्र का सम्मान करें.हिन्दी का खूब प्रयोग करे. इससे हमारे देश की शान होती है. नेत्रदान महादान आज ही करें. आपके द्वारा किया रक्तदान किसी की जान बचा सकता है.

 

मंगलवार, जुलाई 12, 2011

आप भी अपने मित्रों को बधाई भेजें

 "आपको मुबारक हो" के माध्यम से आप अपने स्कूलों व व्यापारिक मित्रों को उनके जन्मदिन, शादी की सालगिरह, उनके द्वारा कोई वाहन खरीदने आदि और अन्य किसी भी प्रकार की "बधाई" का संदेश नाममात्र शुल्क में भेज सकते हैं. आपके मित्र हैरान हो जायेंगे ! आप अपना संदेश कम से कम 5 दिन पहले भेज दें. किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए मुझे संपर्क करें. रमेश कुमार जैन @ सिरफिरा : 9910350461, 9868262751, 011-28563826
नोट : आप संदेश के साथ फोटो भी प्रकाशित करवा सकते हैं. आपको पासपोर्ट साइज़ की फोटो व संदेश (हिंदी में ) ईमेल द्वारा भेजना होगा. "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" द्वारा आप और आपके मित्र को एक-एक ईमेल भेजे जाने के साथ ही आपके मित्र को एक SMS भेजकर उपरोक्त ब्लॉग देखने का निवेदन किया जायेगा.

शनिवार, फ़रवरी 05, 2011

जीवन के उतराव-चढ़ाव का उल्लेख करती एक आत्मकथा

भ्रष्ट अंधी-बहरी न्याय व्यवस्था से प्राप्त अनुभवों की कहानी का ही नाम है

सच का सामना

वाह ! क्या कहने है? किसी ने क्या खूब पक्तियां कही है कि-प्यार एक अहसास है,एक ऐसा एहसास जिसने लाखों लोगों के सपने संजोये, लाखों मुर्दा दिलों को जीने की राह दिखाई....... एक ऐसा एहसास जिसने लाखों लोगों को जीते जी मार दिया, वे ना जी सके और ना ही मर सके, बस एक जिन्दा लाश बनकर रह गए......प्यार जो पूजा भी है...... प्यार जो जिन्दा इंसान की मौत का कारण भी है और उसका कफन भी है... प्यार हरेक के लिए कुछ अलग, कुछ जुदा, कुछ खट्टा और कुछ मीठा है. कुछ लोग मोहब्बत करके हो जाते हैं बर्बाद, कुछ लोग मोहब्बत करके कर देते हैं बर्बाद.

                        मैंने ऐसा अनुभव किया कि-अक्सर लोग दूसरों के जीवन में ताकझांक की कोशिश भी खूब करते/होती हैं. लेकिन अपने दांपत्य जीवन की परतें खोलने का प्रयास कोई नहीं करता. मगर कुछ महिलाएं अपनी करीबी सहेलियों से थोड़ा बहुत शेयर भी कर लेती है. लेकिन पुरुष इस पर कुछ कहना अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ समझता है. वह अपने दांपत्य जीवन को लोहे की जंजीरों से जकड़े रखना चाहता है. मगर कभी-कभी ऐसा होता है कि-एक सभ्य और सम्मानित पुरुष वेकसूर होते हुए भी कसूरवार ठहरा दिया जाता है. तब वो पुरुष अपने दांपत्य जीवन की परतें खोलने के लिए मजबूर हो जाता है.

                       मैंने पूरी ईमानदारी से दांपत्य जीवन की डोर चलाने की बहुत कोशिश की. मगर दूषित बीमार मानसिकता वाली पत्नी और लालची सुसरालियों की साज़िश के साथ ही फर्जी केस दर्ज करने वाले अधिकारी और रिश्वत मांगते पुलिस अधिकारी के अलावा सरकारी वकील,धोखा देते वकीलों की कार्यशैली, भ्रष्ट अंधी-बहरी न्याय व्यवस्था से प्राप्त अनुभवों की कहानी का ही नाम है
"सच का सामना"
शकुंतला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन परिवार के मैनेजिंग एडिटर एंड पब्लिशिंग डायरेक्टर रमेश कुमार जैन उर्फ़ सिरफिरा के प्रेम-विवाह करने से पहले और बाद के जीवन में आये उतराव-चढ़ाव का उल्लेख करती एक आत्मकथा
"सच का सामना"
उपन्यास
के रूप में बहुत जल्द ही प्रकाशित होगी.
एक महत्वपूर्ण वैवाहिक सलाह :- आप पिछले विवादों को बार-बार कुरेदकर एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करें. जो भी मामला या विवाद एक बार सुलझा लें उसके बाद उसे भूल जाएँ. लेकिन कहीं बार कुछ महिलाएं पुराने विवादों को बार-बार कुरेदकर अपने परिवार को अपने हाथों से उजाड़ चुकी हैं. आप कदपि ऐसा करें.
# निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन:9868262751, 9910350461

शनिवार, जनवरी 01, 2011

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!


नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आप सभी पाठकों / दोस्तों को "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार की ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! आप व आपके परिवार के लिए नववर्ष 2011 मंगलमय हो! इन्हीं शब्दों के साथ ही .....

सुनहरे सपनों की झंकार, लाया है नववर्ष
खुशियों के अनमोल उपहार लाया है नववर्ष
आपकी राहों में फूलों को बिखराकर लाया है नववर्ष
महकी हुई बहारों की ख़ुशबू लाया है नववर्ष
अपने साथ नयेपन का तूफान लाया है नववर्ष
स्नेह और आत्मीयता से आया है नववर्ष
सबके दिलों पर छाया है नववर्ष
आपको मुबारक हो दिल की गराईयों से नववर्ष!
नए साल की नई सुबह, लाये नई खुशियों की सौगात, 
सुख-समृध्दी का हो साम्राज्य, सपनों को मिले एक नया आयाम!
यह नववर्ष शुभ हो, नई खुशियों को लाये! 
यह साल मनमोहक फूलों की तरह से हो आपका जीवन!!
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